Wednesday, September 23, 2009

बस...........

रात की स्याही छूट गई ,
तारों की माला टूट गई
वो रात हमारे साथ ही था,
मैं चाँद कहूं तो झूठ नही

4 comments:

Amit K Sagar said...

चिट्ठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. सतत लेखन के लिए शुभकामनाएं. जारी रहें.

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Till 30-09-09 लेखक / लेखिका के रूप में ज्वाइन [उल्टा तीर] - होने वाली एक क्रान्ति!

रचना गौड़ ’भारती’ said...

वाह क्या बात कही है। चिट्ठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. सतत लेखन के लिए शुभकामनाएं. मेरे ब्लोग पर आपका इंतजार है

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

narayan narayan

Chandan Kumar Jha said...

बहुत सुन्दर रचना ।